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कामिनि की रज़ामंदी मिलते ही मैंने उसके नाज़ुक बदन को अपनी बाहों में भर लिया और उसके पतले गुलाबी होंठ चूसने लगा। उसका विरोध अब खत्म हो चुका था।

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